ध्यान को स्थिर करना (Samatha शमथ)
5-5 हृदय सामंजस्य और शारीरिक आह (Sigh)
1. स्वागत और मार्गदर्शन
पांचवें दिन में आपका स्वागत है। आपका तंत्रिका तंत्र तेजी से सीख रहा है। आज हम ध्यान की स्थिरता (शमथ) साधते हैं। भटकता हुआ मन लगातार सूक्ष्म तनाव पैदा करता है। मन को एक शांत लंगर देने से शरीर स्वतः शांत हो जाता है।
2. बौद्ध प्रज्ञा और समझ
कैनन स्रोत शिक्षण: आनापानसति सुत्त (मज्झिम निकाय 118)
शमथ का अर्थ है 'प्रशांति'। परंपरा मन की तुलना बर्तन में भरे गंदे पानी से करती है: यदि आप पानी को साफ करने के लिए बर्तन को हिलाएंगे तो वह और मैला हो जाएगा। यदि आप बर्तन को स्थिर मेज पर रख दें, तो मिट्टी नीचे बैठ जाती है और पानी स्वच्छ हो जाता है।
« नदी की धारा से मत लड़ो: किनारे बैठो और पानी को बहते हुए देखो। »
— आनापानसति सुत्त (मज्झिम निकाय 118)
विचारों से लड़ना भूल है। शमथ जागरूकता को एक सरल और तटस्थ वस्तु (नासिका पर श्वास) प्रदान करता है, जिस पर भटकने पर सहजता से लौटा जा सके।